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चलो धूप से हटके छांव में बैठें फूलों की बातें करें फिर फिर से दोहराने सी किसी भूल की बातें करें •••

चलो धूप से हटके छांव में बैठें फूलों की बातें करें

फिर फिर से दोहराने सी किसी भूल की बातें करें



दिल सुने दिल कहे दिल चाहे बस ऐसी गुफ़्तगू हो

क्यों तल्ख़ियों के चर्चे , क्यों फिज़ूल की बातें करें



कच्चे मकान के पक्के रिश्ते फिर याद किए जाएँ

गाँव की मटियाली सड़क और धूल की बातें करें



शफ़्फ़ाफ़ चाँदनी से रिश्ते की नज़्म हम बुनते रहें

बहिश्त की ख़्वाहिश हो जिन्हें रसूल की बातें करें



जिस्म पर लफ़्ज़ों की नक्काशी नहीं अशआर मेरे

दुख दर्द के किस्से कहें दिले मकबूल की बातें करें



निगाहों की हद से आगे परवाज़ अपनी चाहत की

क्यों रस्मों रिवाज तहज़ीब ओ उसूल की बातें करें


(विनोद प्रसाद )

 
 
 

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